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संस्थागत वित्त, बीमा एवं बाह्य सहायतित परियोजना महानिदेशालय, उ0प्र0, लखनऊ

संस्थागत वित्त निदेशालय की स्थापना शासन के आदेश दिनांक 3 अगस्त, 1972 के अन्तर्गत की गयी थी तथा बाद में शासन के आदेष संख्या- एस0आर0-107/दस-90-212(15)/88 दिनांक 11 जनवरी, 1990 के द्वारा इसे पूर्ण रूप से संस्थागत वित्त एवं सर्वहित बीमा निदेशालय के नाम से परिभाषित किया गया। पुनः शासन के आदेश संख्या -२६ (बी) / क ० नि ० -६-२०१५-९८(७५)/२००० टी० सी० दिनांक ३० जनवरी २०१५ के द्वारा इस निदेशालय का नाम  संस्थागत  वित्त, बीमा  एवं बाह्य सहातित परियोजना महानिदेशालय किया गया है. संस्थागत वित्त, बीमा एवं बाह्य सहायतित परियोजना महानिदेशालय ,उत्तर प्रदेश वित्तीय संस्थाओं/बैंकों के साथ-साथ विकास विभागों के मध्य समन्वय स्थापित करते हुये यह प्रयास करता है कि राज्य सरकार की नीतियों का सही रूप से परिपालन करते हुये विकास कार्यक्रमों को गति प्रदान की जाय। निदेशालय के मुख्य कार्य निम्नवत्‌ हैं:-

1.    केन्द्रीय वित्तीय संस्थाओं/व्यावसायिक बैंकों एवं प्रशासकीय विभागों तथा सार्वजनिक/सहकारी क्षेत्रीय संस्थाओं के मध्य समन्वय हेतु फोरम का कार्य करना। विभिन्न कल्याणकारी एवं रोजगारपरक्‌ योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंकों/वित्तीय संस्थाओं में वित्त पोषण से संबंधित मामलों में कार्यदायी/प्रशासकीय विभागों को सहायता देना।

2.    कमजोर वर्ग के लोगों के लिये रोजगार के संसाधन जुटाये जाने के परिपे्रक्ष्य में बैंक के्रडिट से सम्बद्ध योजनायें प्रतिपादित कर उन्हें उ0प्र0 लोकधन (देयों की वसूली) अधिनियम के अन्तर्गत उन्हें राज्यपुरोनिधानित घोषित करना तथा वित्त पोषण का अनुसरण करना।

3.     सेवा क्षेत्र अवधारणा के अन्तर्गत जनपद के आर्थिक विकास के लिये अग्रणी बैंकों के माध्यम से वार्षिक ऋण योजनायें बनवाना एवं उसके अन्तर्गत वित्त पोषण का सतत्‌ अनुश्रवण करना ताकि सुनियोजित ढंग से प्रदेष का आर्थिक विकास हो सके एवं विभिन्न विकास कार्यक्रमों एवं रोजगारपरक कार्यक्रमों के अन्तर्गत बजटरी भार कम हो सके।

4.     क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों से संबंधित सभी कार्यविधियों का प्रदेशीय स्तर पर समन्वय करना तथा उनके द्वारा की गई प्रगति का अनुश्रवण करना।

5.     जनपद/मण्डल स्तर पर गठित संस्थागत वित्त समन्वय समिति की कार्यविधियों को दिषा-निर्देषित करना तथा उसमें उठायी गयी समस्याओं का निराकरण करना।

6.    बैंकों के ऋण जमा अनुपात का अनुश्रवण करना एवं बैंकों से संबंधित प्राप्त लोक षिकायतों का निस्तारण करवाना।

7.     वसूली प्रमाण-पत्रों के सापेक्ष बैंक बकायों की वसूली में सहायता प्रदान करना। दैवी आपदाओं की दशा में बैंक ऋणों की रिशिड्यूलिंग करना।

8.     भारतीय रिजर्व बैंक/नाबार्ड/भारत सरकार से संस्थागत वित्त संबंधी नीति विषयक मामलों को उठाया जाना एवं उनका हल खोजना।

9.     प्रदेश के ग्रामीण एवं कृषि विकास को संचालित कराये जाने के उद्देष्य से नाबार्ड के माध्यम से प्रति वर्ष पोटेन्शियल लिंक प्लान तैयार कराये जाने में सहायता करना ताकि प्रदेष में नाबार्ड के माध्यम से अधिकाधिक पुनर्वित्त सहायता प्राप्त हो सके। इसके अतिरिक्त नाबार्ड के माध्यम से ग्रामीण अवस्थापना निधि के अन्तर्गत प्रदेश में सिंचाई, ग्रामीण सड़कों, पुल आदि पूर्ण कराने के लिये संबंधित कार्यदायी विभागों एवं नाबार्ड के मध्य समन्वय करना।

10.     नाबार्ड की माइक्रोफाइनेन्सिंग योजनाओं के अन्तर्गत स्वयं सहायता समूहों/कृषक क्लब आदि के गठन में आवष्यक सहायता प्रदान करना ताकि प्रदेष में अधिकाधिक संस्थागत वित्त सुलभ हो सके।

11.     विभिन्न बैंकों/सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा वित्तीय संस्थाओं एवं बैंकों से लिये गये ऋण के अतिदेय को एक मुष्त समाधान के माध्यम से निस्तारित कराये जाने में समन्वय की भूमिका अदा करना।

12. सामाजिक सुरक्षा समूह बीमा योजनाओं का अनुश्रवण एवं अनुसरण कर उनमें गतिषीलता लाना एवं इन्हें और अधिक जनोन्मुखी, व्यापक, सरल एवं व्यावहारिक बनाने हेतु समय-समय पर संबंधित बीमा कम्पनियों/कार्यदायी विभागों को सुझाव देना।

13.     राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर लागू की गई विभिन्न बीमा कार्यक्रमों में यथा सम्भव सहायता प्रदान कर उन्हें क्रियान्वित करना/ जैसे चुनाव के समय चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मचारियों/ सुरक्षा कर्मियों को बीमा का आवरण प्रदान करना।